यारी की रेलगाड़ी

आमेर किला, जयपुर

आज के ब्लॉग खातिर एगो दिलचस्प कंटेंट मिल गइल बा… आशा बा रउवा लोग के पसन्द आई भा रउवा सभे अपना के एह से जोड़ के देखेम… त ई अब रउवा सोझा…

हाई स्कूल के आपन दोस्त-संघतिया सब के याद करीं?
मिडिल स्कूल वाला दोस्तन के भी याद कर के देखी?
दिमाग पर तनिका अउर जोर दीं भा बचपन के पहिला-दूसरा में संघे पढ़ल दोस्तन के याद क के देखीं?

कुछ-कुछ याद आ गइल होइयसन… कुछ के खाली चेहरा याद होइ नाम ना। कवनो इतना दूर चल गइल होइ की शायद ही रउवा कभी ओकरा से मिल पाई…। भा कवनो इतना बदल गइल होइ की रउवा मिल ही ना पायेम।

चलीं अब हम आपन कहानी पर आवsतानी… बात जब दोस्तन के होला त दिल में हिलोर होखे लागेला…। अब हमनी के स्कूल लाइफ खत्म हो गइल बा… भा कॉलेज लाइफ चालू होखे वाला बा। (12th appeared in this year) त बात ई बा की हमनी के सब केहू के फील्ड चेंज हो गइल बा…। केहू कहीं जाइ-केहू कहीं, ओहि ई अब मुश्किल बा की हमनी के फिर एक साथ हँसी-मज़ाक करे खातिर, एक दूसरा के टाँग खिंचाई करे खातिर… मस्ती करे खातिर एक साथ मिल पाई जा। एहि से हमनी के 7 आदमी के टूर तैयार भइल हा। “जयपुर टूर”।

एह टूर के खास बात ई रहल हा की एमे हमार पहिला क्लास से ले के हाई स्कूल तक के दोस्त शामिल रहल हन। अब एह से बढ़ खुशमिज़ाज़ मौका भा टूर कहीं ना मिली। भले गरमी के दिन बा लेकिन टूर जयपुर के रहल हा। एकर कारण ई बा की ई टूर एगो सोचल-समझल, जानबुझ के कइल साजिस के कारण सफल भइल हा। बात ई बा की छः जाना लोग आपन NDA के फॉर्म के सेन्टर जयपुर डलsलस। ई NDA भाजपा के गठबंधन वाला NDA ना ह, ई NATIONAL DEFENCE ACADEMY वाला ह। सातवाँ जन हम रहनिया त हम फॉर्म ना भरले रहनी लेकिन कहनी की तहनीsलो के परेशान करे खातिर हमू साथ चलेम।

ई त बात भइल टूर के चालू भइल के, अब तनी बात होखे टूर के तैयारी के… त बात ई बा कि जब टूर फाइनल भइल ओकरा बाद छः के छः अइसन बाड़sसन की ठेल के टिकट करावे के पड़लs… रोज निहोरा करे के पड़लs, बिना रिजर्वेशन के ट्रैन में का गति होला सब के सपना देखावे के पड़लs तब जा के जाए के टिकट भइल लेकिन आवे के ना, माने लौटानी के टिकट ना भइल।

19/04/2019 इहे डेट ह जब टूर चालू भइल… 7 जाना के टोली बनारस में चढ़ल… “अजमेर गरीब नवाज” में… एह ट्रेन के बारे में बस एतने कहेम ट्रेन ई साचो में गरीब बिया… माने एतना गरीब की मालगाड़ी के पास करावे खातिर एकरा के घण्टा भर रोक देहल जात रहल। अब ई चर्चा छोड़ी… बात करीं सफर के। हम अभी तक ज्यादातर सफर जनरल बोगी में कइले रहनिया जेनरल बोगी के एगो खासियत ह की भले ग़ज़न होला आदमी के बाकी आदमी बोर ना होला… उहे रिजर्वेशन में ग़ज़न ना होला लेकिन अकेला आदमी बोर हो जाला। लेकिन बात जब दोस्तन के संघे सफर के होइ त बोर शब्द शब्दकोश से ही गायब हो जाला। पता ही ना चलुवे बनारस से 20 घण्टा बाद कब जयपुर पहुँच गउवे आदमी। बस जवन मज़ा आइल बा उ नइखी लिख सकत। उ त रउवा सब भी आपन पुरान दोस्तन के साथे टूर फिक्स क के कर के देखी… महसूस तबे हो पाई हमार फीलिंग।

जयपुर सिटी के नाम पिंक सिटी बा, काहे की इहा के सब दीवार, सब ना भी त सार्वजनिक दीवार पिंक पेंट (गुलाबी रंग) से रंगल बा। बाकी हमरा बिचार से ई शहर ग्रीन सिटी भी बा…। अभी तक हमार घुमल कुछ सिटी में जयपुर ही सबसे ज्यादा हरियाली युक्त रहे। पर्यटन केंद्र के रूप में जयपुर त प्रसिद्ध ही बा…। हम बस एकाद फ़ोटो शेयर कर सकतानी बाकी रउवा मन करे त रउवा भी आपन दोस्तन के संघे जयपुर घूमे के प्लान बना सकेनी…।
जयपुर ही ना कहीं के टूर करीं लेकिन आपन बचपन भा स्कूल के दोस्तन के संघे टूर कर के देखी बहुत अच्छा लागी।

मामा पंचर वाले 24 घण्टे सेवा उपलब्ध…
ई ऊपर वाला लाइन के साथ ब्लॉग के एहिsजा रोकेम बहुत लंबा हो गइल बा…?

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Kundan Chaudhary

हमार छोटा प्रयास बा भोजपुरी खातिर कुछ कर सकी... भोजपुरी हमार माई भाखा ह, भा माई हमरा सबसे प्यारी बाड़ी। हम सिवान के आन्दर से बानी अभी हम दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल महाविद्यालय के छात्र बानी।

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