निहोरा

काहनाम बा की भाखा अभिव्यक्ति के एगो तरीका ह। माई भाखा से बढ़िया कवनों भाखा में रउवा आपन मन के बात आ भावना नइखी कह सकत। राउर आपन भाखा, आपन बोली राउर व्यक्तित्व के चमकावेला। सोची रउरा पैदा होते जवन बोली से आपन माई के गोहार लगइनी उहे भाखा रउवा बड़ होके बोले में शरम काहे आवता। इ ठीक उहे बात बा जवन बड़ होके आपन माई-बाबू के छोड़ल होला। आ गवई संस्कृति ई ना कहेला की रउवा आपन माई-बाबू के छोड़ी, ई हमनी के संस्कृति में हईलहि नइखे फिर हमनी के भाखा के संघे अइसे काहे करतानी जा।

एगो कहानी बा की एक बेर राजा कृष्णदेवराय के दरबार में एगो बहुभाखी आदमी आइल आ उ राजा के चैलेंज देलस की हम रउरा दरबार में कई भाखा में बात करेम बाकी राउर कवनों मंत्री हमार माईबोली (मातृभाषा) के बता ना पाई। उ दिनभर कईगो भाखा में बात कइलस सबकेहु सोचते रह गइल की आखिर एकर आपन भाखा का बा। फेन तेनालीराम के एगो उपाय सुझल उ का कइलन की रात में जहाँ उ विद्वान सुतल रहे ओइजा जा के उनका के डरा देहलन फेन विद्वान झटपट खटिया से उठल आ जोर से आपन भाखा में आपन माई के चिलइलस। एह से तेनालीराम के उ विद्वान के भाखा मालूम चल गइल।

ई कहानी एहजा लिखे के बस इतना मतलब बा की रउरा भले कवनो भाखा में केतनो विद्वान हो जाई… आपन भाखा छोड़ दोसरा के भाखा के शेक्सपियर काहे ना हो जाइ लेकिन जब रउवा दुःख-सुख, खुशी-गम आपन भावना के उद्गार निकले के होइ त रउवा आपन माईभाखा ही बोलेम, ओ समय रउरा मुह से उ राउर 17 गो भाखा में से कवनो काम ना आई जवना के रउवा विद्वान बानी। आ ई काम तेनालीराम एह से कइलन काहे की उहो जानत रहलन की केहू दुःख में आपन भाखा नइखे भूल सकत। रउवा भी जब दुःख में रहेनी त “Ohh Mom” ना कहेनी बाकी उकरा जगह पर “माई हो” कहेनी।

जे भोजपुरी भाखी नइखे उकर त बाते छोड़ी जे भोजपुरी भाखा परिवार से बा भोजपुरी जानत-बुझेला उहो सौखे भोजपुरी से दूरी बनवले रहता। उ सोचेला की भोजपुरी बोलेम त इज्जत घट जाइ, लोग कही की देख ई त भोजपुरी बोलता। भाई ई हाल तब होइ जब दु आदमी में से एगो भोजपुरी बोले के जानता आ एगो नइखे जानत बाकी जब दुनु जाना जानतानी लो त चाप के बोली ना भोजपुरी। शरम कवना बात के बा।

कुछ लोग ई कहेला की भोजपुरी में मिठास नइखे भोजपुरी कड़क लागेला। त भाई ई भोजपुरी के ना एमे राउर आ रउरा परिवेश के कमी बा ना त एक हाली कवनो अच्छा खाटी भोजपुरिया से बात कर के देखी तब मालूम चली की भोजपुरी में चीनी के कमी बा की रउरा दिमाग में। एक हाली कवनो भोजपुरी साहित्य किन के पढ़ी फिर मालूम चली भोजपुरी का ह आ कइसन बा।

कुछ लोग बोलेला की भोजपुरी अश्लील हो गइल बा। हम इहे कहेम की कवना में अश्लीलता नइखे पंजाबी, मलयालम कवना में नइखे बस बात इतने बा की भोजपुरी के अश्लीलता लउकेला बाकी अउर सब के ना लउकेला। ह ई बात हमू मान तानी की भोजपुरी में अश्लीलता बावे लेकिन रउवा बताई कबो रउवा आख़र भोजपुरिया के यूट्यूब पर सर्च कइले बानी, राउर त मानसिकता बा की जहां भोजपुरी शब्द दिखल उ अश्लील होइ, रउवा कबो शारदा सिन्हा चाहे भारत व्यास के सुने के कोशिस कइले बानी। रउवा त बस इहे जान तानी की भोजपुरी के एकहि चैनल बा वेबवा आ दु-चार गो स्टार और कुछ कुकुरमुत्ता जइसन गायक बाड़सन जवन अइसन-अइसन गाना गावेलसन की उ खुद बजा के ना सुन पावेलसन। आ रउवा उहे सब गाना सुन के भोजपुरी के बारे में आपन मानसिकता बना लेले बानी। तनी बदली।

भोजपुरी गायक लोग से भी एगो अनुरोध बा जदि रउवा ई पोस्ट के पढतानी त तनी रउवो सोची की रउवा ई आपन माई भाखा के साथ का कर तानी आ पूरी भोजपुरिया समाज आ संस्कृति के चन्द पैसा आ नाम खातिर बर्बाद कर तानी। अगर सिख लेवे के बा त शारदा सिन्हा, भारत व्यास आ नितिन नीरा चंद्रा भईया जइसन लोग से सीखी। ई त बस दु-चार ही नाम बा लेकिन जब रउवा सिख लेवे के मन होखे त नाम के कमी ना होइ जे भोजपुरी खातिर बढ़िया काम करता अउर कईले बा।

आज जरूरत बा आपन भाखा, आपन संस्कृति आ आपन गवई वातावरण बचा के रखेके आ एकरा खातिर जरूरी बा की रउवा खुद सोची की रउवा आपन स्तर से एकरा खातिर का कर सकेनी। लोग रउरा के भटका सकेला त कुछ लोग सहायता भी कर सकेला। लेकिन निर्णय रउरे हाथ में रही की रउरा का करे के चाहतानी।

“आपनमाटी” एगो छोटा सा मंच बनावल गइल बा उ लोग खातिर जे इंटरनेट पर भोजपुरी पढ़े आ लिखे के चाहता आपन माई-आपन भाखा से जुड़ल रहे के चाहता।

रउवा आपन लेख कवनो विषय पर भोजपुरी में लिख के भेज सकेनी आ कुछ लोग कहेला की हम भोजपुरी बोल त लेवेनी लेकिन लिख ना पावेनि त उकरा से बस इहे कहेम की एक हाली लिख के त देखी फिर आदत लागत देर ना लगी।

Kundan Chaudhary

हमार छोटा प्रयास बा भोजपुरी खातिर कुछ कर सकी... भोजपुरी हमार माई भाखा ह, भा माई हमरा सबसे प्यारी बाड़ी। हम सिवान के आन्दर से बानी अभी हम दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल महाविद्यालय के छात्र बानी।

One thought on “निहोरा

  • February 26, 2019 at 3:16 am
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    तू, हम, भोजपुरी आ बिहार एक दिन कामयाब जरूर होई।

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