भोजपुरी अउर संयुक्त राष्ट्र संघ

आज के दिन माने 21 फरवरी के “विश्व मातृभाषा दिवस” मनावल जाला। एह दिन के पीछे लम्बा कहानी बा। आजे के ही दिने 1952 में पूर्वी पाकिस्तान में यानी आज के बांग्लादेश में ओइजा के विश्विद्यालयी छात्र सब के तरफ में विरोध प्रदर्शन कइल गइल कि ‘बांग्ला’ के राष्ट्र भाषा बनावल जाव। ई प्रदर्शन के दबावे खातिर भयंकर खून-खराबा मचवाल गइल फेन आखिरकार आन्दोलन ठंडा पड़ गइल। बाद में 1999 में यूनेस्को एह दिन के मातृभाषा दिवस मनावे खातिर तय कइलस। अंत में 2008 में संयुक्त राष्ट्र संघ एह दिन के “विश्व मातृभाषा दिवस” के रूप में मान्यता दे ही देलस।

मातृभाषा के परिभाषित कइल मुश्किल बा बाकि मोटामोटी कहल जाला कि छोटे बच्चा जवन परिवेश में जमन लेला भा उ परिवेश के भाषा सिखेला-बोलेला उ मातृभाषा होला भा एहिजा परिवेश के मतलब परिवार से बा।

भोजपुरी खाली बिहार-पूर्वांचल के भाषा ही ना ह, वैश्विक भाषा ह भा ई बात के पुष्टि संयुक्त राष्ट्र संघ के “मानवाधिकार” पर आधारित भोजपुरी लेख से भी होला। ई लेख रउरा भी पढ़ सकेनी pdf डाऊनलोड कर के?

सभे केहू के मातृभाषा दिवस के अनघा शुभकामना?

Kundan Chaudhary

हमार छोटा प्रयास बा भोजपुरी खातिर कुछ कर सकी... भोजपुरी हमार माई भाखा ह, भा माई हमरा सबसे प्यारी बाड़ी। हम सिवान के आन्दर से बानी अभी हम दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल महाविद्यालय के छात्र बानी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Pin It on Pinterest