माई के अँखिया

पिछले दिन जवन घटना भइल ओहसे खाली हमार भा राउर ही ना पूरा देश के आँख में लोर बा, भा लोर से ज्यादा क्रोध बा। काला दिन… 14 फरवरी, इतिहास के सबसे ‘करिया’ दिन कहाई… शाम के समय मोबाइल में गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप, न्यूज़ हंट भा बाकी न्यूज़ एप्लिकेशन के नोटिफिकेशन घंटी बाजल चालू भइल। ई आवाज़ तनिक अलग लागत रहे, आवाज में तनी उदासी बुझात रहे। व्हाट्सएप के ग्रुप में 5-10 गो फ़ोटो आइल। डाउनलोड होखे से पहिले ही बुझा गइल फ़ोटो कवनो बड़ दुर्घटना के बा। देह के चिथड़ा देख के देह सहर गइल, बाकी फ़ोटो देख के कुछ ना मालूम चलल।

तुरंते एगो और पॉप उप आवता गूगल न्यूज़ के कि पुलवामा में “आतंकी हमला” दिमाग सुन हो गइल। जइसे-जइसे बात मालूम होत गइल… दिमाग में गुस्सा के तूफान उठे लागल… आपन भा पूरा देश के भावना का लिखी… कुछ नइखी लिख पावत हम… बस आज भी दिमाग में एकहि बात बा कइसे भी “बदला”। घटना के बाद से आज तक बहुत कुछ लिखल जा चुकल बा… हर पोस्ट के पढ़ के खून खउले लागेला… बहुत कविता लिखल जा चुकल बा जे के पढ़ के उ शहीद जवान के पत्नी, एगो माई, एगो बाप, एगो बहिन, एगो बेटा भा छोटकी बिटिया के बारे में सोच के करेजा फाट जाला। बरमंड में आग जवन लागल बा उ त अलग बा।

हमनी के एगो दोस्त बाड़ेन हिमांशु जिनकर परिवार के लोग भी CRPF में बा उ सुझाव देहलन की कविता, कहानी, ब्लॉग त खूब लिखाला- शहीद के भा उनकरा घर के लोग के भावना पर लेकिन जवना घर के लोग “सैनिक-जवान” बा भा ओइसन जगह पर पोस्टेड बा जहाँ प हमला भइल बा उनकरा पर का बीतत होइ ई बात पर भी कुछ लिखे के चाही। ई बात के जरूरत हमार एगो अउर दोस्त प्रधान प्रभात के भी महसूस भइल आ हमरा से कहलन की हम ई भाव पर कविता लिख सकेनी। फिर एगो मित्र के भाव, दूसरा मित्र के शब्द से कविता में बदल गइल।

ई कविता के पढ़ी भा रउरा से निहोरा बा अगर पसंद आवे त ज्यादा से ज्यादा एके शेयर भी करि???

बबुआ,
नौ महीना कोख में, बानी हम तहरा के रखले,
खून-पसीना जरा-जरा के, जतन से बानी पलले।
अपना आँचल से छोड़ाऽ, भारत माई के दामन में डाल देहनी,
भारत माई के आपन करज, तहरा से हम चुका देहनी।

पर ई माई के आँख ह, अँसुवा त बहाइये देला,
पठानकोट, उरी अउर पुलवामा में, जब तहार पोस्टिंग होला।
आवेला जब भी हमला के, कवनो खबर टीवी पे,
धकऽऽ से करेला करेजा, छाती हमार फट जाला।

मन हमार रहेला बेसुध, अँखिया मोर पथरा जाला,
तहार कुशल खबर पाई के, मनवा मोर जुड़ा जाला।
जवन बचवा शाहिद भइलें, उनकर माई के दशा का होइ,
ई बात सोचही के, अँखिया मोर लोरा जाला।

Kundan Chaudhary

हमार छोटा प्रयास बा भोजपुरी खातिर कुछ कर सकी... भोजपुरी हमार माई भाखा ह, भा माई हमरा सबसे प्यारी बाड़ी। हम सिवान के आन्दर से बानी अभी हम दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल महाविद्यालय के छात्र बानी।

4 thoughts on “माई के अँखिया

  • February 19, 2019 at 10:53 pm
    Permalink

    Bhute niman kavita ba

    Reply
  • February 19, 2019 at 10:57 pm
    Permalink

    bhute niman likhael ba

    Reply
  • February 20, 2019 at 1:57 am
    Permalink

    Great skills of creation

    Reply
    • February 21, 2019 at 9:13 am
      Permalink

      धन्यवाद अमित जी

      Reply

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