शिक्षा

शिक्षा मूल तत्व ह मानव के इंसान बनावे खातिर। शिक्षा में ज्ञान, उचित आचरण भा तकनीकी दक्षता, शिक्षण भा विद्या प्राप्ति कइल आदि शामिल रहे लाs।
        शिक्षा आज के सबसे ज्वलंत बाकि सबसे अनदेखी कइल मुद्दा बा। सोची जब-जब चुनाव आवेला जातिवाद, गाय-बैल, भाजपा-कांग्रेस भा खूब मन करे ला त बेरोजगारी-विकास के मुद्दा उठेलाs। लेकिन कबो कवनो दल के शिक्षा नीति पर विचार ना होला… जबकि शिक्षा ही सबके पहिला सीढ़ी ह।
        का आज के शिक्षा व्यवस्था सही बा? भारत के छोड़ी, भारत के शिक्षा व्यवस्था के अभी मत सोची… बस रउवा आपन बिहार भा पूर्वांचल के शिक्षा व्यवस्था के बारे में सोची…। सही बा? राज्य सरकार के स्कूल भा राज्य सरकार के शिक्षा व्यवस्था के नीति सही बा? कुछ दिमाग में खटक ताs? अगर ह त तनी एह मुद्दा पर भी ध्यान दीं… ज्यादा ना थोड़ा सोची… भा कुछ कर सकीं त विचार बनाई…। परिवर्तन एगो अकेला आदमी भी ला सकतs बा एह बात पs हमरा पूरा विश्वास रहे ला… ओहि से हम हमेशा एह आशावादिता से बस इहे कहेनीs- सोची भा कर सकीं त करीं।
        हम इहा एगो छोट सुझाव प्रस्तुत करे खातिर ई ब्लॉग लिख रहल बानी। बाकी हमरा लागता सुझाव से पहिले आज के बिहार भा पूर्वांचल के शिक्षा के स्थिति तनी देखे लेवे के चाही…। त चली देखल जाव…

वर्तमान शिक्षा स्थिति-
        रउवा सोच के देखी जब ईगो छोट लइका के पढ़े के उमर आवेलाs त अगर रउवा पईसा वाला बानी त फिर कवनो दिक्कत नइखे। रउवा अपना लइका के नाम ‘अंग्रेजी माध्यम’ के स्कूल में लिखवाएम। भा ठीक-ठाक पईसा-कौड़ी बा त गाँव के छोट-मोट ‘प्राइवेट स्कूल’ होला ओइजा नाम लिखवाएम। बाकी एकदम आर्थिक कंगाली बा त; या त रउवा आपन लइका के ना पढाएम या गाँव के सरकारी स्कूल में भेजेम। भारत के संविधान में ‘शिक्षा के अधिकार’ देवल बा। मतलब हर 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के लइका-लईकी के मुफ्त में अनिवार्य शिक्षा मुहैया करावल माता-पिता/अभिभावक भा सरकार के जिम्मेदारी बा। तनी देखल जाव तs ई अधिकार के उपयोग भा निर्वाहन बखूबी हो रहल बा। लेकिन जवन शिक्षा के गुणवत्ता बा ओमे कमी बा।
        ज्यादातर सरकारी स्कूलन के ई स्थिति बा की अगर राउर लइका पहिला से ही सरकारी स्कूल में पढ़ता त फिर भविष्य संकट में बा। हालांकि अइसन सब सरकारी स्कूलन में नइखे। आगे अगर लइका पढ़े में तेज बा कइसे भी कर के अच्छा से दशवां-बारहवां कर भी ले ता…। तब फिर आगे के शिक्षा व्यवस्था अंधकार में बा। आज के स्थिति ई बा की बिहार के कवनो विश्वविद्यालयन के सत्र समय से नइखे चलत। बिहार के शान ‘मगध विश्वविद्यालय’ के भी सत्र समय के पटरी से उतर गइल बा।
        आज के ई बदतर स्थिति; सीधा तैर प कहल जाव त हमनी के बदतर शिक्षा के स्थिति ही हमनी के पिछड़ापन, बेरोजगारी, गरीबी के कारण बा। जहाँ के शिक्षा व्यवस्था काबिल बनावे लायक ना रही, ओहज के युवा गुंडा ना बनियसन त का बनियसन? लखैरा, दिहाड़ी मजदूर ना बनियसन त का बनियसन? एतना, जवन स्थिति के हम बतावतानी ई सब त प्रतिदर्श बा… बाकी सब स्थिति के बारे में रउवा सभे बखूबी जानतानी। अइसन नइखे की ई सब स्थिति ठीक करे मान के नइखे, ठीक होइ बस थोड़ा सरकार के भा थोड़ा हमनी के भी सोच विचार करे के पड़ी।

सुझाव/उपाय-
        अब तनी चर्चा उपाय भा सुझाव के लेके कइल जाव। अगर शिक्षा के व्यवस्था के सुधार खातिर सरकार जिम्मेदारी नइखे लेत तब हमनी के का कर सकतsबानी जा?
        1. जागरूकता के काम
        2. आन्दोलन
        3. खुद के व्यवस्था
अब ई तीनों बिंदु पs ध्यान से बिचार करीं
        1. जागरूकता- कवन बात के जागरूकता ई पहिले साफ कइल बहुत जरूरी बा। त देखी अब जारूकता के बात ई नइखे रह गइल ही हमनी के फलाना से कही जा की तू अपना बेटा-बेटी के स्कूल भेज…। काहे की सरकार इतना कुछ कर देले बिया की लोग पढ़ावे खातिर ना सही पईसा खातिर आपन बेटा-बेटी के स्कूल भेजता। अब इहा जागरूकता एह बात खातिर जरूरी बा की पईसा त मिलिए जाइ…। रे फलांवा पईसा से ज्यादा ध्यान अपना बेटा-बेटी के पढ़ावे पs दे। कहीं मास्टर साहेब दिखस त ई पूछ की हमार लइका पढ़े में कइसन बा? का करीं हम की उ पढ़े में अच्छा हो जाव? लेकिन ना, आज के माई-बाबू ई पुछेला की हमार लइका के पईसा कब आई, पईसा खातिर मास्टर साहेब के नटीs पs चढ़ल रहेला। एहिजा जागरूकता जरूरी बा की गाँव के 4-5 आदमी के समूह स्कूल व्यवस्था के देखरेख करे, स्कूल में पढ़ाई के व्यवस्था कइसन बा, लइकासन के का स्थिति बा? तब जा के शिक्षा में सुधार के शुरुआत होइ। ई काम अगर गाँव के सम्मानित व्यक्ति भा जनप्रतिनिधि के छत्रछाया में होइ त सबसे बढ़िया रही। बात आ काम में दम रही।
        2. आन्दोलन- हमरा लागेला की कुछ बदलाव बिना क्रांति के आsही नइखे सकतs। उहे श्रेणी में हमनी के आज के शिक्षा व्यवस्था भी बा। आज एगो अइसन ‘सम्पूर्ण क्रांति’ के जरूरत बा जवना से प्राथमिक से लेके विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षा के सुधार के बात जुड़ल होखे। देखीं आज प्राथमिक स्कूल के कमी नइखे, जहाँ तक बात बा शिक्षक के त उहो लोग काम चलाऊ संख्या में बा लोग, लेकिन अब जरूरत बा… गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देवे के तरीका का होखे, ई खुद जे शिक्षक बा ओकरा सोचे के पड़ी, भा हम एह बात के लेके आशावादी बानी की जब शिक्षा खातिर एगो ‘सम्पूर्ण क्रांति’ होइ त जे शिक्षक बा उहो खुद सोची की अपना-आप में हम का बदलाव करीं की ई आन्दोलन सफल होखे। ऊपर जवन जागरूकता वाला बात बा उ भी ई आंदोलन से जुड़ सकत बा।
        थोड़ा आगे बढ़ के माध्यमिक विद्यालय भा उच्च विद्यालय पर नज़र डालल जाs…। आज पूरा बिहार में मात्र एकहि स्कूल बा जवन हर साल टॉपर देवेलाs। सिमुन्तला। का सरकार अइसन स्कूल हर ज़िला में नइखे खोल सकत? बिहार सरकार में एतना क्षमता नइखे की 38 गो स्कूल के शैक्षणिक भा प्रशासनिक व्यवस्था खुद संभाल सके? कर सकेले बिहार सरकार। बस हमनी के ओकर आँख के पट्टी खोले के पड़ी।
        एगो और विचार हमरा माथा में खटकsता। हाल ही में झारखंड बोर्ड के आठवाँ के रिजल्ट आइल ह। झारखंड बोर्ड के आठवाँ के एग्जाम वैकल्पिक प्रश्नावली से भइल हा, माने पूरा प्रश्न-पत्र 1 नम्बरीया रहे। ई एग्जाम के बाद हमरा दिमाग में बात आइल की ई एग्जाम करावल गइल हाँ की जवन लइका एमे पास होइ उहे नौवाँ में जाइ। त फिर सरकार साथे-साथे एक और काम कर सकतिया…। की पूरा राज्य के उच्च विद्यालय के परीक्षण कर के कम-से-कम 100 या 200 स्कूल के रैंकिंग में बाट दित… आ फिर लइकासन के सुविधा दित की उ आपन इच्छा अनुसार आ आपन प्रदर्शन के अनुसार विद्यालय के चुनाव कर सकताs। एह से फायदा होइत की विद्यालय में भी आपन स्थिति सुधारे के इच्छा जागृत होइत भा साथ ही छात्र भी आगे के शिक्षा के अच्छा माहौल प्राप्त करे खातिर आपस में प्रतियोगिता करतsसन। एह से हम कह सकेनी की प्रतियोगी माहौल शिक्षा के तीव्र सुधार के बहुत बढ़ हथियार हो सकत बा।
        आन्दोलन के तत्काल जरूरत बा त उ विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षा में सुधार खातिर जरूरी बा। आज बिहार के कवनो राज्यस्तरीय विश्वविद्यालय के स्थिति सही नइखे। भा अगर ई बात पs ध्यान आज के युवा शक्ति ना देहलस त फिर ई एतना नीचे गिर जाइ की बाद में उठावल मुश्किल हो जाइ। हमरा बतावे के जरूरत नइखे की आज के विश्वविद्यालयन के का हाल बा? सभे केहू ई बात के जानता बस जरूरत बा अब ई स्थिति के सबकरा सामने… सबसे पहिले जे ई स्थिति के सुधार करे वाला बा ओकरा सामने पूरा जोर-शोर से लावे के। भा एह खातिर जरूरी बा बस एगो “सम्पूर्ण क्रांति”…
        3. खुद के व्यवस्था- खुद के व्यवस्था मतलब का? त एकर सीधा भा साफ मतलब इहे बा कि हमनी के सरकार के मुँह ताकल छोड़ अपना से व्यवस्था करे के चाही। ई बात बहुत बड़हन बा…। मुश्किल भी बा, लेकिन नामुमकिन नइखे। सोची स्वेच्छा से सफाई अभियान चल सकता, कवनो काम करे खातिर सहकारी समूह बन सकता। त फिर शिक्षा खातिर सहकारी अभियान नइखे चलावल जा सकत। का जवन युवा पढ़-लिख के गाँव में ही बा उ एगो न्यूनतम परिश्रमिक पर आपन श्रमदान नइखे कर सकत, शिक्षा अभियान से जुड़े खातिर। जरूर कर सकता…?, बस जरूरत बा त अइसन व्यवस्था ओकरा मुहैया करावे के। का ई संभव नइखे की एगो सहकारी संगठन बनावल जाव जवना के पूरा व्यवस्था पारदर्शी लोकतांत्रिक होखे भा उ संगठन शिक्षा के क्षेत्र में काम करे। अगर पूजा समिति, स्वच्छता समूह, रक्तदाता समूह, गरीबी सहायता समूह, आपदा प्रबंधन समूह आदि बन सकता त फिर एगो शिक्षा सहायता समूह काहे नइखे बन सकत जवन एगो अइसन मंच प्रदान करे जहाँ पढ़ावे के इच्छा रखे वाला आदमी स्वेच्छा से पढ़ा सके त उहे मंच सब केहू के न्यूनतम दर पs सबका के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्रदान करे। सब चीज़ संभव बा। बस सोच-विचार के जरूरत बा… भा ई सब कर सके के इच्छाशक्ति के जरूरत बा।

हमरा खातिर सबसे बढ़ खुशी के बात इहे बा की रउवा ई ब्लॉग के पढ़त… एहिजा तक आ गइनी। अब अच्छा लागल होखे त शेयर भी कर दीं ताकि अप्रत्यक्ष रूप से ही सही क्रांति के शुरुआत आज से ही हो जाव। रउवा अइसन ब्लॉग हमेसा पढ़े खातिर हमनी के फेसबुक पेज? https://www.facebook.com/aapanmaati.in/ के लाइक कर सकतsबानी।?

बहुत-बहुत धन्यवाद???

Kundan Chaudhary

हमार छोटा प्रयास बा भोजपुरी खातिर कुछ कर सकी... भोजपुरी हमार माई भाखा ह, भा माई हमरा सबसे प्यारी बाड़ी। हम सिवान के आन्दर से बानी अभी हम दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल महाविद्यालय के छात्र बानी।

2 thoughts on “शिक्षा

  • April 17, 2019 at 5:39 pm
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    बहुत बढ़िया प्रयास बा

    Reply
    • April 18, 2019 at 10:13 am
      Permalink

      धन्यवाद… शेयर भी करीं

      Reply

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