स्त्री

कभी कवनो ना चाहत , न कभी कवनो माँग।

अइसन होखेलि स्त्री।

पलकन पे आंसू के बोझा लेके भी होंठन पे मुस्कान रखेली।

अइसन होखेलि स्त्री।

आपन अस्तित्व के छोड़के, कोई के पत्नी, कोई के बेटी आउर कोई के प्रेमिका बन जालि।

अइसन होखेलि स्त्री।

आपन वेदना के सह के, आपन अस्मिता के पुरूष पे निछावर करके परमेश्वर बना देहेलि।

अइसन होखेलि स्त्री।

आपन आदतन के , आपन चाहतन के बदल देहेलि, आपन अरमान के हर एक करवट के बदल देहेलि।

अइसन होखेलि स्त्री।

आपन सबकुछ त्याग के समुन्दर न सही समुन्दर के एक ठोप में भी मिल जाला उनकर अस्तित्व।

अइसन होखेलि स्त्री।

सभके पूरा करके भी उ हमेशा कही न कही अधूरी रह जालि।

अइसन होखेलि स्त्री।

ई एकही शब्द में पूरा ब्रह्मांड समा जाला।

अइसन होखेलि स्त्री।


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