The Moment In भोजपुरी

मूल कविता अंग्रेजी में

ई कविता मूलरूप से मार्गरेट अटवुड के लिखल ह… लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय के एगो प्रतिष्ठित कॉलेज खातिर एकर भोजपुरी अनुवाद हमार दूगो मित्र लोग कइलस…। प्रधान प्रभात भा हिमांशु रोशन लाल बड़ी मेहनत से ई कविता के एगो विदेशी भाषा इंग्लिश से आपन माईभाखा भोजपुरी में अनुवाद कइल लो… रउवा लोग ई दुनू जाना के कविता पढीं भा बढ़िया लागे त जरूर शेेेयर करीं। पढ़ीं जा-

बहुत बेरा बाद जब तू घरे लौट के अईबऽ,
आपन कइल मेहनत पे, तू ईतरइब,
रहब तू अकेले भा तू सफ़र के देखी के
“हम कइले बानी” अइसही कहबऽ।

ओहि बेरा, सुख के बदरी दुर हो जाइ,
अँगना के चिरई, तोहरा से छूट जाइ,
घमंड के पर्बत जाइ अईसही उखड़,
साँस के तार, भी बयार में उड़ जाइ।

तू कुछ नइख पइले, कुदरत फुसफुसाई,
बारी-बारी सब आवेला-जाला इहे बताई,
तहार नइखे कुछ भी ई जवार में,
मय जीव हमार बा, कह के प्रकृति मुस्कुराई।

-प्रधान प्रभात


आँखी के सोझा जब तू काम प ईतरइब,
फुरसत के घरी अपना-आप के सरहबऽ,
जब लागी की बड़ी मेहनत से कइले बानी,
जब हर चीज के तू आपन बतइबऽ।

पौधा तक भी मुँह फेर लिहें,
चिरई तक बोलाल छोड़ दीहें,
बयार बही अनकर देने,
परबत भी सब टूट जईंहें।

फेर उ सब काने-कान बतियइहें,
तोहर कुछ ना ह बतलइहें,
केतना अइले केतना गइलें,
पर हमनी कोई के ना ही भइलें।

-हिमांशु रोशन लाल

Margaret Atwood

धन्यवाद?

Kundan Chaudhary

हमार छोटा प्रयास बा भोजपुरी खातिर कुछ कर सकी... भोजपुरी हमार माई भाखा ह, भा माई हमरा सबसे प्यारी बाड़ी। हम सिवान के आन्दर से बानी अभी हम दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल महाविद्यालय के छात्र बानी।

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